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Hymn No. 534 | Date: 31-Dec-1998
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नशा बहुत किया, कुछ देर के बाद साथ हर इक् ने छोडा ।
नशा बहुत किया, कुछ देर के बाद साथ हर इक् ने छोडा ।
तेरे प्यार का नशा जो चढा मुझपे, रात हो या दिन उतरनें का नाम न लेता।
जाम के बोतलों को कई बार धीरे – धीरे खाली होतें देखा ।
तूझे जब भी दी आवाज प्यार के जांम से लबालब पाया।
कई गाँज गिर चुकें है इस सर पे, होश ना है कुछ करनें की।
यहाँ इक् ही धुन है समायीं, तेरे प्यार का जाम पीनें की दिन – रात ।
भटक गया मैं यहां – वहाँ, तू ना डरना दोष ना देगा तूझे कोई ।
सब यहीं कहेंगे शराबी पीकें लुढक गया।
मंजूर है मुझे सब कुछ तहे दिल से, जो होना है होने दें तेरे मुताबिक ।
मेरा दिल तेरे प्यार में डूब चुका है, दुनिया और तन पे क्या बीतें कीस खबर।


- डॉ.संतोष सिंह