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Hymn No. 535 | Date: 31-Dec-1998
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जब भी झुकेंगा यें सर तेरे आगे ना कीसीके, चाहें रौंदा जाये हम उफ तक ना करेंगे।
जब भी झुकेंगा यें सर तेरे आगे ना कीसीके, चाहें रौंदा जाये हम उफ तक ना करेंगे।

गेसुं बहाऊँगा तेरे प्यार में याद करकें तूझे, दुख आते जाते रहेगे दिल में उफ तक ना होने देंगे।

पुकारूंगा मदद के लिये तूझे हर बार मैं, यें हाथ ना पसारूंगा कीसी के सामनें उससे पहले कट जायेगे।

बांवरा बनकें फिरूंगा मैं तेरे लिये, पर बिचारा बननें ना दूंगा कीसी के नजरों में अपने आपको।

तेरा हर सजा कबूल है हमें तेरी रजा मानेंगे, कोई इस बेख्याली मे ना रहे कूछ भी करेगा लब सी लेगें हम।

सब कुछ मंजूर है तेरे बतायें राह पे चलनें के लिये, दूश्मन भी मिलेगा प्यार से आवाज दूंगा तेरे कहनें पे।

सितम कोई ढाता है मुझपे गलतफहमी में, हाथ जोडके तुझसे कहुंगा माफ कर देंना तू इसे।

कीसी और पे कोई हथि उठायेंगा तो करूंगा पुरजोर विरोध, अपना – पराया भूलाके जो तू करवायेगा वो करूंगा।

भूल जाये वें लोग मुझे, जो कहते है वे मेरे माता – पिता है, मेरा तो एक ही नाता है वो तू है ।

त्याग मुझे ना करना है कीसीका, तेरे कहनें पे सबको अपनाना है एकसा।


- डॉ.संतोष सिंह