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Hymn No. 536 | Date: 31-Dec-1998
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चाँद – सुरज मैं तुझसे नहीं मांगता, ना ही तुझको में तुझसे हूँ मांगता ।
चाँद – सुरज मैं तुझसे नहीं मांगता, ना ही तुझको में तुझसे हूँ मांगता ।
हम तो तेंरी यादों को दिल में संजोना है चाहते ।
फरियाद ना हूँ तुझसे करता, हाँ याद कर लेता हूँ घड़ी दो घड़ी तूझें ।
जालीम दिल है मेरा जो डूबा रहता है तुझमें, होश ना रहता कुछ उसे ।
गम की शिकायत ना हूँ करता, ना ही खुशीयाँ तुझसे हूँ चाहता।
हम तो तेरा साथ चाहते है, हर पल तूझें जी भरकें देखनें के वास्ते ।
सतायें हुये है हम तेरं प्यार के, जो चाहते है तेरे कुछ काम आना ।
साथ निभा न पानें की सजा जो देनीं है दे दें, पर मेंरी प्रेम कहानी का अंत ना करना।
में तुझसे कुछ अलग से ना हूँ मांगता, तेरे प्यार पे सॉरी दौलत लूटाना हूँ चाहता।
मुरीद हूँ तेरा बहुत पुराना, करीब आना चाहता हूँ तेरे बनकें दीवाना ।


- डॉ.संतोष सिंह