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Hymn No. 537 | Date: 01-Jan-1999
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पुकारता हूँ मैं तूझे, अपने जेहंन में बसानें के लिये ।
पुकारता हूँ मैं तूझे, अपने जेहंन में बसानें के लिये ।
अधुरा तब तक रहूंगा, जब तक पूर्ण रूप से जुड ना जायेगे तुझसे ।
प्यार बहुत मैं करता हूँ, तुझसे दिल ही दिल में ।
शब्दों में ढाल नहीं पाता हूँ, अपने प्यार को गीतों में।
तेरी सत्ता में जिसनें किया, परम विश्वास श्रध्दा से।
काबील बना बिन कुछ कीयें तेरे प्यार के ।
हर सुख है इस जग का क्षण मात्र के लिये।
टिकता नहीं कुछ भी मिटता रहता है, जो जुड़ा तुझसे नश्वरता को भूलाता।
मुझे कुछ ना विचार करना, दुनिया के हर लोक – लाज को छोडके।
तेरे प्यार में अंधा हो जाना है, जो होगा उसे भी ना देखना ।


- डॉ.संतोष सिंह