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Hymn No. 555 | Date: 05-Jan-1999
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यहाँ – वहाँ, जहाँ – तहाँ हम रहे, दिल तो तेरे करीब है रहता।
यहाँ – वहाँ, जहाँ – तहाँ हम रहे, दिल तो तेरे करीब है रहता।

कहता नहीं कुछ तुझसे, याद करके तुझको बहुत है रोता।

तडप उठता है देखके तूझे, लब कंपकंपा के रह जाती है कूछ कहनें के वास्ते।

तेरीं निगाहो से निगाह मिलते ही, शघ्ब्द भीतर ही भीतर पीघल के रह जाते है ।

रहता नहीं कूछ दिल कें पास, ना जाने क्याँ – क्याँ देनें की सोचता है तूझे।

कीतनी मजेदार बात है, कूबेर को धन देनें चला है निर्धन।

मन ही मन प्यार करकें तूझे बौरा जाता है दिल, शाश्वत प्यार मिल जाता तेरा न जाने क्या हाल होता दिल का।

कीसी का ख्याल ना करता, अपनी धून में तूझे जान कें सबसे अपने दिल का हाल कहता।

समझायें समझ न पाता, हर कुछ को समझ बैठता है तूझें ।

जुर्रत देखकें दिल की डर लगता है आबादी को छोड वीरानें में तूझे ढुंडता है।


- डॉ.संतोष सिंह