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Hymn No. 554 | Date: 05-Jan-1999
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भग्न होता है दिल मेरा, जब तुझको अपने आस – पास नहीं पाता ।
भग्न होता है दिल मेरा, जब तुझको अपने आस – पास नहीं पाता ।
तेंरी कृपा से गाता है गीत तेरा, अंजाने तू खींचा चला है आता है ।
दर्द तूने बहुत दीया, दबा जाकर के तू बस इस दिल के करीब रहना।
मुरीदं बनके तेरा मैं तूझे पुंजा करूंगा, मजनू के भांती हर पल पुकारता फिरूंगा।
डरता हूँ तुझसे मिलनें के लिये, कहीं मेरी तडप जात ना रहे तेरे प्रति।
तडप बडा दें तू मेरी इतनी बिन विचलीत हुये, मैं खोया रहूँ तेरे प्रीत में।
मुझे ना बनना है कोई साधु – सन्यासी मा तो बनना चाहता हूँ तेरा दीवाना ।
आहत ना होता हूँ कीसी की बातों से, बिसार चुका हूँ सब कुछ प्यार में तेरे।
ना जमीं, ना ही आसमा चाहीयें मुझे, इन सबसे कहीं दूर तेरा प्यार चाहीयें ।
भोगकें सब कुछ सहा जुलम मैंने, प्यार भरी बातें मुझें अपने प्यार से करने दें तू।
- डॉ.संतोष सिंह
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