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Hymn No. 585 | Date: 11-Jan-1999
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जो कूछ भी देंगा, तू ही देंगा, तेरे सिवाय कौन देगा।
जो कूछ भी देंगा, तू ही देंगा, तेरे सिवाय कौन देगा।
हम मांगते नहीं, एक बात है तुझसे कहतें ।
तेरे आश्रय तो सब है, सबकें कोई नहीं ।
हम सबके पास ऐसा ना कुछ है जो हो हमारा।
तेरे सहारें ही तो सब कुछ पाया, तूझपे लुटाया।
ना था हमारें पास कुछ, ना होगा हमारा कूछ ।
सौ बात की इक् बात चकोर तरसे सदा चांद के लिये ।
हम भी तडपतें है न जाने कीतनें काल से तेरे वास्तें ।
चाहता हूँ क्यॉ कर दूं कुछ ऐसा, तू खुश हो जाये ।
तेरी खुशी को हूँ अपना मानता, कैसे बताऊँ कीतना हूँ चाहता।
तन पे दाग हजारों हजार है हमारें, दिल में ना कहीं खराश।
मन भटका हजारों गलीयों में, चैंन नहीं आया जब तक तूझे न पाया।
साया बनकें रहना चाहता हूँ संग तेरे, मन का मैल मिटा दें ।
दिल कब का हो चुका है तेरा, कैसे कहूँ है वो मेरा।


- डॉ.संतोष सिंह