VIEW HYMN

Hymn No. 586 | Date: 12-Jan-1999
Text Size
मुझें कुछ ना है पता, क्या – क्या होता है तेरे सिवाय्।
मुझें कुछ ना है पता, क्या – क्या होता है तेरे सिवाय्।
हम तो है तेरे शरण में तू ही तू है हमारा कर्ता - धर्ता ।
तेंरी नजरों से चाहते है देखना इस जग को।
हो के भी ना हो हम, तेरे होनें में हमारा होना हो।
समर्पण के राह मैं को अपनाना चाहते है, वश में होके तेरे।
जीवन के हलाहल को पी जाना चाहता हूँ नाम लेकें तेरा।
बिन घबरायें जीवन के हर पहलु को पार कर जाना चाहता हूँ ।
बोध करके कुछ भी करना नहीं चाहता, हो जाऊँ में तेंरा।
कोई सवाल ना करता हूँ तुझसे, ना ही चाहता हूँ कोई जवाब ।
तेरे आगोश में मैं मूक् बनकें सो जाना चाहता हूँ ।


- डॉ.संतोष सिंह