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Hymn No. 587 | Date: 12-Jan-1999
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मातहत बना लें तेरे, जो तू कहेंगा वो करेंगे ।
मातहत बना लें तेरे, जो तू कहेंगा वो करेंगे ।
तेरे बतायें राह पे निर्भिक हो कें चलेंगे।
मेंरी स्वतंत्रता से अच्छी है तेरी परतंत्रता।
पशु की तरह है हम तेरे बिना प्रभु ।
मति – कूमति में बदलती रहती है हर पल ।
माया के वश में रहते है, ना की अपने ।
फरियाद तुझसे ना हूं करता, हाँ तेरा आशीष हूँ चाहता।
मैं अपना ना बनकें अपनाना चाहता हूँ तूझें।
परिणाम की परवाह ना है, मैं तुझसे प्यार करना चाहता हूँ ।
संगत मेरी इतनी बूरी ना है, तू बदल ना सकें मुझे ।
क्षण मात्र में ब्रह्माण्ड को रचकें मिटानें वालें कृपा कर हमपे ।
तेरी छत्र छाया को जिसनें पाया, भाग्य उसपे मुस्कूराया।
तेरा प्यार अमिट – शाश्वत है जो बदला ना कभीं ।
गहनं है तू तेरी सृष्टि, हम अज्ञानी ना कुछ जाने ।
लालायीत हूँ मैं तूझें पानें के लिये, कुछ कर जाने के लिये।
मेरे वश की बात ना है, जब तक तेरा साथ ना हो।


- डॉ.संतोष सिंह