VIEW HYMN

Hymn No. 588 | Date: 12-Jan-1999
Text Size
कशीश आनीं बाकी है, हममें तेरे प्यार की बन जायेगे हम तेरे रसिक।
कशीश आनीं बाकी है, हममें तेरे प्यार की बन जायेगे हम तेरे रसिक।
माशुक तो तेरे हम है, सदियें पुरानें दिल लगाना, तुझमें अभी है बाकी।
तेरे प्यार का अहसास हमें होना बाकी है, हमारें प्यार का अहसास तूझें कई बार हुआ।
यें सब तू ही तो है कहलाता हमशें, कहलानें के पीछे दिल का हाल सुन लेता है तू हमारें।
मंजील तो है अभी बहुत दूर, यें तो शुरूआत है प्यार के सफर का।
राह में कठनाइयाँ आयेंगी हजार, पार करतें जायेगे तेरे प्यार में होके गुम।
सवालें का अंत नहीं होता, प्यार करनें वालों को समझाया नहीं जा सकता।
प्यार में जरूरत ना होती है कीसीकी, उसमें तो खुदा की रहमत होती है ।
अंत होना आज नहीं तो कल, मुलाकात करेंगे तुझसे प्यार के आकार में ढलके ।
ललक पूरी होगी दिल की, जी न जाने कीतने समय से दफन थी सीनें में।


- डॉ.संतोष सिंह