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Hymn No. 592 | Date: 13-Jan-1999
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हमारा प्रभु हमारें लिये जमीं पे उतर आया है और हम जानं न पायें ।
हमारा प्रभु हमारें लिये जमीं पे उतर आया है और हम जानं न पायें ।

मूरत के आगे बैठ जब दिल का हाल सुजाया उसको, तो उसनें हमको बुलाया।

कीतनी अजीब बात है प्रभु नें अपना प्यार देकें प्यार करना हमको सीखाया।

न जाना था उसको कोई बात न थी, अब जब जान गये है क्यों बेभान हुये।

तोड़ दें तू हमारी तंद्रा, श्वास के लोभ को भूलाकं प्यार करने लग जाये तुझसे।

अंधकार भरें मन में तू जला दें प्यार का दीप, भूला देंना चाहता हूँ जीवन को।

मेरा होश गुम हो जाये तुझमें, होश में आकें क्यों जुडूं अपनेपन से।

मिलकें तू ना मिलेंगा, जो ढाल न पायें इस जीवन को प्यार भरें गीतों मैं ।

सदा से तुझको हमनें चाहा, फिर भी भटकें प्यार से भरी डगर से।

मुझे दूर करना नहीं आता अपनीं इस कमीं को, हा चाहत है तेरा बननें की।


- डॉ.संतोष सिंह