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Hymn No. 591 | Date: 13-Jan-1999
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काका नाम की गूंज हो सदा हमारें कानों में ।
काका नाम की गूंज हो सदा हमारें कानों में ।

हमारें दिल के भीतर समां जाये सदा के लिये।

धडकें हमारा दिल, हर धडकन पे नाम निकलें उसका।

भूलजायेगे मन को जब होगा बोल – बाला दिल का।

दिल की मौजों पे हम रहे सदा, छायीं रहेगी मस्ती तेरी।

हम तो जुडेंगे तुझको हर जगह, ना ही कीसी एक विशेष जगह ।

इस छोर पे जाये या उस छोर पे, हर छोर पे तू ही नजर आयें।

भूलेंगे हम सब कूछ, यें दिल ना भूलेंगे तुझको।

नभ में रहे या जमीं पे, भान कैसे होगा कीसीको।

काका के धूनों पे जो थिरकतें है हम अपना ख्याल कैसे होगा।

हर लोक – लाज को भूलाके, तन मन दौड़ेगा उसकें पीछें।

दिल जब है दीवाना उसका, तो ध्यान कैसे टिकेंगा कीसी पे।

छलपेगा हमारें भीतर बाहर काका नाम का जाम ।

दिल को पीनें की क्या जरूरत, वो तो डूबा है उसमें ।


- डॉ.संतोष सिंह