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Hymn No. 608 | Date: 16-Jan-1999
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बोल होगे तेरे, गीत होगे मेरे, गुनगुनायेगा तू लिखा करेंगे हम ।
बोल होगे तेरे, गीत होगे मेरे, गुनगुनायेगा तू लिखा करेंगे हम ।
आंखमिचोंली का खेलं खेलें तू हमशें, दिल बिचारा ढुंडे, तूझे हर पल ।
दूर – दूर तेरा कहीं नामोंनिशान ना होता है, डर जाता है मन बिचारा ।
ढुंडतें है हम तूझें अपने ख्यालों मे, यादों से तेरी मोहब्बत है करते।
पास जब तू रहता है, उमंगो से भर जाता है दिल हमारा ।
नजर भलें तू नहीं आयें, पर तेरे सान्निध्य का पता दिल को है चल जाता ।
बिन कहें तू बहुत कुछ सुना जाता है, तरन्नुम में वहीं है दोहरातें हम ।
मांगने से पहले बहुत कुछ हमें तू दें जाता है, बिना कुछ जतायें ।
सताया है हमनें तूझे बहुत बार, दौडा चला आया तू हमारें पुकारनें पे ।
मगरूर हम बनें तूझें पाकें मगरूयीत से दूर रहना सीखाया तूने ।
प्रतिपल चाहते है तूझें, कुछ कर ना दिखाते है तूझें पानें जैसा ।
फंसाना चाहते है शब्दों से तूझे अपने प्यार का वास्ता देकें ।
समझता है तू सब कुछ, फिर भी है हमें अपनाता।
हर हमारी कोरी गप्प को अंदाज करकें देता है सान्निध्य अपना ।


- डॉ.संतोष सिंह