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Hymn No. 619 | Date: 18-Jan-1999
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आलम छा गया है मुझपे, तेरा ओं मेरे बालम् ।
आलम छा गया है मुझपे, तेरा ओं मेरे बालम् ।
हें जानम तू मेंरा, कीतनें जनमों से खाब देखा था तेरा ।
रंग भर लेना चाहता हूँ, जुडके तुझसे जीवन के हर पहलु में।
न आना हो, न जाना हो, तूझे सदा के लिये बना लूं अपना ।
जपनां ना पड़े मुझें नाम तेंरा, प्रस्फुटित होता रहे सदा दिल में ।
खबर कीसी को हो या ना हो, मुझे रहे तेरी खबर हर पल ।
सकूंन मिलता है दिल को, जब आता है नजर चेहरा तेरा ।
दामन में बांध लेंना चाहता हूँ, कसकें अपने तूझे ।
मायावी तूफां कीतना भी आयें ना कोई छुडा सकें मुझको तुझसे ।
सीनें में दफन कर लेनां चाहता हूँ तेरी हर बात को ।
राज ना रखना चाहता हूँ तेरे – मेरे बीच में कोई।
सो जाना चाहता हूँ सदा के लिये कंधो पे सर रखकें तेरे ।


- डॉ.संतोष सिंह