My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 620 | Date: 18-Jan-1999
Text Size
ओं मेरे महबुब तेरे कीतनें है रूप बता दें तू मुझे ।
ओं मेरे महबुब तेरे कीतनें है रूप बता दें तू मुझे ।
छलता है तू हमें नित्य नयें – नयें रूप बनाकें सदा से ।
तेंरी इसी अदा पे होश कीतनों ने खोया, खुद को भुलाकें ।
करता है तो ठीक है, पर क्यों हमारें दिलों को तू है छलता।
नांच – नंचाता है तू हमें, अपने पास बुलाकें, मस्ता जातें है हम।
सताता तू है हमें, अपने से दूर करकें क्यों देता है सजा।
विरह के गीत गाते है हम बिछोह में तेरे, पास आनें के लिये।
नीर बह निकलते है आँखों से हमारें, याद करकें तूझें ।
फिर भी तू ना पसीजें, तू ही बता कैसे मनायें हम तूझें ।
बांध लेना चाहता हूँ मैं तूझे, अपने अटूट बंधन में ।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
आलम छा गया है मुझपे, तेरा ओं मेरे बालम् ।
Next
विचलीत कर जाता है हमको मन हमारा, रोड़े और कोई ना है डालता।
*
*