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Hymn No. 632 | Date: 20-Jan-1999
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रोग लग जाये मुझें तेरां, कीसी भी क्षण ना रहूं अकेंला ।
रोग लग जाये मुझें तेरां, कीसी भी क्षण ना रहूं अकेंला ।
मलाल कीसी बात का ना है, हलाल हो जाये जीवन तेरे कदमों में ।
मुकरनां ना है मुझें, प्यार जो किया तुझसे विष पीला या अमृत पी जायेगे खुशी से ।
आँखों में आँसू है ता देखं के तेरीं रहनुमाई, कांटो से भरा था दामन फिर भी अपनाया तूने ।
अहसास है हमें तेरे प्यार का, बहक के साथ क्यों पकड लेते है तूफां का।
हिचकेंगे ना कभी तेरे बुलानें पे, हंसते – हंसते चढ जायेगे खुलीं पे तेरा प्यार पानें के लिये ।
अब तक गवानें के सिवाय कोई काम न किया, संवरना तो अब है तूझे पानें के लिये ।
मेरे महबुब फनाह हो गया तूझपे कोई बात नहीं, तेरे कदमों की जो धूली मिल गयीं कामयाब हो गया मैं ।


- डॉ.संतोष सिंह