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Hymn No. 631 | Date: 20-Jan-1999
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झुठां ना हूँ प्रभु, धोखा दें देतां हूँ अपने आपको ही ।
झुठां ना हूँ प्रभु, धोखा दें देतां हूँ अपने आपको ही ।
रच मात्र को संदेह ना है दिल में प्रभु तेरे लिये।
कई जनमों के करमों के सिकडाsं में बंधे है हम, तोड़ना तूझे है ।
मलाल कोई ना है तुझसे, अफसोस होता है अपनं जीनें के ढर्रे पे ।
सीखानें वाला जब तू है, हमें सीखनें से कोई परहेज ना है ।
गाफील ना करताहै कोई, गाफील हो जातें है हम इच्छाओं के पीछे ।
लापरवाही बहुत करता हूँ प्रभु, सम्भालनें वाला एक तू ही है हमें ।
बहुत से वादें करके तोड़ा है हमनें, तुझसे झुठ ना बोला हूँ कभी ।
टूंटू मैं, टूटें मेंरा गरूर, लुट जाये मुझसे सब कुछ, प्रभु तू साथ छोडना ना कभी ।
डरता हूँ तुझसे पर प्यार ज्यादा उससे हूँ करता, मरनें से ना डरता तेरे लिये ।


- डॉ.संतोष सिंह