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Hymn No. 637 | Date: 21-Jan-1999
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फरियाद समझ ना याद कहता है यें दिल तुझसे, दिल ही दिल में बाते करना सीखा।
फरियाद समझ ना याद कहता है यें दिल तुझसे, दिल ही दिल में बाते करना सीखा।

भटकता है मन इधर – उदार तेंरी आवाज सुनकें, खो जायेगे प्यार को तेरे याद करकें ।

संगत तो है बहुतों की रास नहीं आता दिल को कोई, यहाँ –वहाँ भटक के पहूँच जाता है पास तेरे।

तरसता हूँ तेरे लिये, हर पल रहना चाहूँ बनकें तेंरी परछाई, समझ नहीं पाता संग तेंरा कैसे मिले।

कुछ ना चाहीयें मुझें हर जनम में बहुत कुछ पाया, समय रहतें जो तू हाथ न आया गंवाया सब कुछ मैंने ।

तडपना बहुत हो गया अब तूझे पास आना होगा इसे तू जिद्द समझ या आग्रह।

जों कुछ भी पाया था आज नहीं तो कल पड़ा है खोना, इस सबसे दूर हो जान है अब तेरे ।

आदत को छोड स्वभाव बन जाये मेंरा यें कहीं भी जाऊँ रह न पाऊँ तेरे बिना ।

दिल के संग मन भी गुहार लगाता है तूझें, राहत मिलती भी है तो तेंरी यादों से ।

स्वीकार कर लें मेंरी प्रार्थना, न जाने कब से कर रहा हूँ तेरा हो जाने के लिये ।


- डॉ.संतोष सिंह