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Hymn No. 638 | Date: 22-Jan-1999
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प्रभु शरण देना मोहें अपने चरणों में, भटका हूँ बहुत तेरे लिये ।
प्रभु शरण देना मोहें अपने चरणों में, भटका हूँ बहुत तेरे लिये ।
तेरे अमृतमय वचनों को सुन – सुनकें, दिल खो जायेगा तुझमें ।
बिछुडा हुआ था तुझसे कई जन्मों से, इस अभागे को सकून मिल जायेगा।
मुझ ना चाहियें कुछ तुझसे, मेरे प्यार को कबूल तू कर लेना ।
हसरतें अभी सभी मरीं नहीं है मेंरी, परम् हसरत है मेरी मीत बन जाऊँ मैं तेरा ।
दुख मुझे कीसी बात का ना है, दिल सालता है जब तुझको भूल जाता हूँ ।
उलझनें जीवन की बहुत सी बाकी है, सब की सब सुलझ जायेगी तू जो हो गया मेरा।
फरमान नहीं करता, ऐ मेरे मौला तेरे चरणों में बैठ गुजारिश हूँ करता ।
बिसात कभी कोई ना थी मेंरी, मुझें तो है मिटना बैठ चरणों में तेरे ।
दिल बहुत कुछ है कहता तुझसे, लब पे आतें – आतें शब्द हो जातें है गुम ।


- डॉ.संतोष सिंह