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Hymn No. 639 | Date: 22-Jan-1999
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जुनुनं जो छा गया मुझपे तेरा, होश में ना रहता हूँ मैं अपने फिकर जात रहीं, प्यार में मैं जो खो गया तेरे ।
जुनुनं जो छा गया मुझपे तेरा, होश में ना रहता हूँ मैं अपने फिकर जात रहीं, प्यार में मैं जो खो गया तेरे ।
लत ऐसी लगी है मुझे, खुद मुझको समझ ना आ रहीं है, क्या कर रहा हूँ मैं ।
समझ – समझकें कई जीवन जीया मैंने अकेले, अब बेसुध हो जाऊँ मैं तुझमें ।
नशा बोतल में सब क्यों है खाजतें, दिल का नशा है ऐसा सुबह हो या रात ना उतरें कभी ।
जुर्रत मेंरी बडती जा रहीं है, हर दिन मेंरा मैं मरता जा रहा है ।
बहुत कुछ सुना था जाननें का मौका पास आकें मिल गया तेरे ।
गीत हो कैसा जो गाया दिल से हमनें झुमां देता है मीत को मेरे ।
जान जायेगे जो सब मेरे गीत के बारें में दीवानें की जगह पागल कहलाऊँगा ।
जिनकी बुतों की है सब पुजतें, उनकें बाहो में हाथ डालकें हम है डोलतें ।
गोल – मोल मैं ना कहना हूँ, जो कहलाया उसनें वहीं तो कहता हूँ।
जाना नहीं पड़ता है उसे कही ढुंडनें, जुनून जब छाता है उसे सब जगह पाता हूँ।
- डॉ.संतोष सिंह
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प्रभु शरण देना मोहें अपने चरणों में, भटका हूँ बहुत तेरे लिये ।
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