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Hymn No. 640 | Date: 22-Jan-1999
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कोई क्याँ जाने मुझे क्या मिल गया, बैठें – हालें मुझें वो मिल गया ।
कोई क्याँ जाने मुझे क्या मिल गया, बैठें – हालें मुझें वो मिल गया ।
न जाने कहॉं मेंरा दिल खो गया, मैं आज हुआ हूँ खुश मेरा मैं मर गया ।
खुशी – छुपायें ना छुपती है रात – दिन, मैं अपने आपको खोता जा रहा हूँ उसमें ।
जिसम मेंरा क्या – क्या हरकत है करता, मुझें कुछ ना भानं है रहता ।
इक् समय था जो दर्द से मैं डरता था, आज वो दर्द सबसे प्यारा लागें मुझको ।
क्या बताऊँ क्या हाल हुआ है मेरा, बाहर की छोड भीतर से बेहाल हुआ हूँ ।
पलीता लगा दें कोई मुझें, जी भरकें दूंगा आशीष मैं उसे ।
विशेष से निशेष हो जाउँढगा, मैं अपने प्रिय के घर जाऊँगा ।
पूछो मत तूम कुछ मुझसे, मेरी हालत ना ऐसी हें बयां कर सकूं सब तुझसे ।
क्यां कर दिया तो तू कुछ और जानेगा, हम तूझे कुछ ना समझा पायेंगे ।


- डॉ.संतोष सिंह