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Hymn No. 642 | Date: 23-Jan-1999
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फरख बहुत है पड़ता, दिल जो लग गया तुझमें ।
फरख बहुत है पड़ता, दिल जो लग गया तुझमें ।
भानं कुछ ना होता, तेरी कृपा से संसार का हर दिन हें गुजरता ।
रोतें थें खुब हम, तेरे पास आ गये बदल गयीं दशा हमारीं ।
अब भी रोते है, याद कर – करकें तूझें मनानें के लिये ।
अपना होके बहुत कुछ किया, खाँब देखा नित्य नयें – नयें ।
सीखा दीया तूने प्यार की निगाहो से जग को देखनां ।
चित्त पे छाप अब कोई ना छोड पाता है हमारें ।
लग गया है तुझमें, नित्य नयें – नयें रूप देखता है तेरा ।
अज्ञानता भरी पड़ाr थी हममें, कीसी जानवर से ना थें कम ।
तेंरी विशालता है हमें मुक्त करा दिया मन के कुचकों से ।
सदा – सदा कें लिये तेरा हो जान चाहता हूँ पिता ।
तू रख दे जहाँ ढल जाउँढ मैं उसमें, चित्त में रहे तू सदा ।
- डॉ.संतोष सिंह
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मत बता तू कुछ मुझे तेरे बारें में, मैं भी कुछ कम नहीं जान जाऊँगा सब कुछ तुझसे ।
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युध्द चल रहा है हमारे मन के भीतर न जाने कीतनें कालों से ।
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