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Hymn No. 651 | Date: 25-Jan-1999
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लाखों – लाख लोग मिलेंगे, तुझसा ना कोई मिलेंगा ।
लाखों – लाख लोग मिलेंगे, तुझसा ना कोई मिलेंगा ।
हजारों – हजार साथी बनेंगे, तेरा साथ है सबसे निराला ।
ढेर सारे है रिश्तें – नातें, तेरा मेरा रिश्ता सबसे आला ।
जन्नत भी फीका लगें, तेरे दर के मुकाबलें ।
कहता ना हूँ मैं, दिल को तू ही तो है भाता ।
कभी ना कभी मन भरता है सभी से तेरा साथ ना कभी छोडना चाहें ।
मस्त तो मन कई बार हुआ, तेरी मस्ती में कूछ और बात है ।
बहुत कुछ है कोई दें सकता, फिर भी तेरे आगे है सब फीकें ।
चाह के भी कोई पुरा ना कर सकता हें तेरी कमीं को ।
तेरे बिन अधुरा है दिल हमारा और यें जग सारा ।


- डॉ.संतोष सिंह