VIEW HYMN

Hymn No. 650 | Date: 25-Jan-1999
Text Size
विशिष्टता की चांह ना है मुझे, तेरे प्यार कें कूछ वास्तें कुछ करना हूँ चाहता ।
विशिष्टता की चांह ना है मुझे, तेरे प्यार कें कूछ वास्तें कुछ करना हूँ चाहता ।
तूझें पानें के लिये, तेरे दिल पे अमिट छाप छोडना हूँ चाहता ।
तेरी कृपा हमपे बहुत है, दूर रहे या पास, पातें है हम तूझें अपने साथ ।
रोना मैं नहीं चाहता हूँ, तेरे बतायें राहो पे लेकें चल दूं तेरां नाम।
हर हालत में काबु रहे दिल पे मेरे, तेरे सिवाय कुछ ना आयें उसमें ।
प्यार का सौदा मैं नहीं हूँ करना चाहता, प्यार का सौगात देनें की है तमन्ना ।
फसादों का जन्म होता है चंचल मन में हमारें, कूछ ऐसा हो सिर्फ तू रहे मन में ।
पल – पल कदम मेरे बडतें रहे तेरी ओर, अंजाम की परवाह ना करूं मैं ।
जरूरत कोई भी आयें जीवन में, तुझसे ज्यादा कोई जरूरत ना रहे मुझे ।
दगा खाऊँ मैं कीतना भी कीसीसे, दंगे का ख्याल न आयें दिल में ।
ताना – बूनां बूनतां है हर पल मन मेरा, कैसे भी करकें बन जाऊँ मैं तेरा ।
कोई कोर – कसर ना हूँ छोडना चाहता, प्रिय मैं तुझमें खो जान चाहता हूँ ।


- डॉ.संतोष सिंह