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Hymn No. 654 | Date: 26-Jan-1999
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अपनीं मजबुरीयों को भुलाकें, चलनें को बेकरार हूँ मैं संग तेरे ।
अपनीं मजबुरीयों को भुलाकें, चलनें को बेकरार हूँ मैं संग तेरे ।
मोह की हर बेडीयों को तोड़ दूंगा, जो बाधा डालें तेरे – मेरे बीच में ।
तेरे प्यार में खो जाता हूँ इतना, गलत क्या, सही क्या भान ना होता है कीसीका।
इलजाम कोई लगाता है मुझपे तूझे लेकें, एकरार कर जायेगे सजा पानें के लिये ।
मुझें ना कुछ है जताना तूझें, बस प्यार ही प्यार करता जाऊँ मैं तुझसे ।
आदत न हीं डालना चाहता हूँ दिल को तेरी, स्वभाव बन जाये प्यार करना उसका।
संयुक्त हो जाना चाहते है तुझसे इतना, भान ना रहे दिल को तुझसे जुडनें का ।
बांधा डालें गर कोई, फर्क ना पड़े उसे वो तो बन चुका है तेरा ।
कहनें को क्याँ कहूँ तुझसे, जो कहें वो आवाज बनकें निकलें तेरी ।
प्यार की हर सीमां को तोड़के, प्यार में ढल जाये प्यार बनकें देना ।


- डॉ.संतोष सिंह