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Hymn No. 658 | Date: 27-Jan-1999
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प्यारें, न्यारें हमारें पिता, रहता है तू संग हमारें सदा ।
प्यारें, न्यारें हमारें पिता, रहता है तू संग हमारें सदा ।
अंजान रहतें है हम तुझसे, साथ निभायें तू सदा ।
अनोखा है तू हम भी कम नहीं, जग में रहतें तेरे, भुल जातें तूझें ।
चाहते है कुछ पाना तुझसे नित्य नया – नया, लेना आभी आया हमें नहीं ।
देनें की तमन्ना है बहुत कुछ तूझें, देंना सीख पाया नहीं ।
विश्वास की कमीं है हममें, तेरा विश्वास जीत पाया नहीं ।
संगत चाहते है तेरी, दुसरों की संगत में रम जातें है हम ।
प्यार तुझसे करनें लगें, दुनिया में मन लगाते है अभी बहुत ।
तेरे सम्मुख रहके तरसते है तेरे लिये, बंद ना हुआ तरसना ओरों के लिये ।
सर्मपण करना चाहता हूँ, अर्पण करना सीखा दें तू हमें ।
भक्त तेरा में निर्बल मन वाला, जिद्द पे खडा मैं तेरे लिये ।
कमीयाँ आ जात है जमीं से जुडतें ही, जमेंगे तेरे सामनें ना कीसीकें ।
खुद्दार है हम बहुत, उतनें ही उदार है हम तेरे लिये ।
सब कुछ कर सकते है, छोडकें सब कुछ कहनें पे तेरे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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