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Hymn No. 686 | Date: 01-Feb-1999
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हकदार ना थें हम कीसी कें, हदार बनाया तूने ।
हकदार ना थें हम कीसी कें, हदार बनाया तूने ।
दामन पे दाग अनेक थें, हर दाग को मिटाया तूने ।
हर पल सताया है तूझे, फिर भी करीब बुलाया तूने ।
जुल्म अनेकों अनेक ढाया, कायापलट किया हमारा तूने ।
अपने वास्तविक संस्कारों को भूलें थें, याद दिलाया तूने ।
जीते थें गमों की दुनिया में, आनंद में रहना सीखाया तूने ।
अपनीं करतूतों से उबर न पायें थें, उबारा तूने गीतों को सुनाकें ।
याद दिलाया तूने हमकों हमारीं, पहलु में अपने बिठाकें ।
जताया प्यार सदा हमपे, भूलाकें हमारीं दूर्गुणों को ।
योग्यता ना थी तेरे करीब आनें की, करीब बुलाया तूने ।


- डॉ.संतोष सिंह