VIEW HYMN

Hymn No. 692 | Date: 02-Feb-1999
Text Size
प्रभु तू तो है दुनिया का मालीक, मेरे जिगर का टुकडा तू ही है ।
प्रभु तू तो है दुनिया का मालीक, मेरे जिगर का टुकडा तू ही है ।
चांद सीतारों में तेरा रूप नजर आवें, तेरे बगेर कोई नहीं इस जहाँ में ।
धोखा देते है हम अपने आपको, तुझसे अलग सब को देख कें ।
तेरे प्यार में डूबी हुयीं अंतरआत्मा को, तुझसे अलग कोई ना नजर आता।
छलता रहा है तू हमकों प्यार में, नित्य नये – नये रूप बनाकें ।
दिल को लुभाया है तूझें सदा से, मन में न जाने कीतनी की मनमानीं ।
काबील हम ना थें, काबील बनाया तूने अपने प्यार से ।
जानं न सका मैं तूझे अब तक, तेरा अहसास किया कई बार मैंने ।
टूट जाने दें मेरा हर भरम पनाह दे दें तू मुझें अपने श्री चरणों में ।


- डॉ.संतोष सिंह