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Hymn No. 711 | Date: 06-Feb-1999
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पुकार सुनता है तू मेरी, कैसे कर सकता है न ।
पुकार सुनता है तू मेरी, कैसे कर सकता है न ।
जब इस धरा पे आयें है, कुछ तो होगी तेरी मर्जी ।
इतना व्याकुल न बना था इच्छाओं के पीछे, जो तू साथ छुडा ले ।
रोंकूगा न रास्ता तेरां, न ही दूंगा कसमें ।
पुकारना तो दूर हम प्यार करेंगे दिल ही दिल में तुझसे ।
तेरी जुदाई से उपजे हुये आँसू सूख जायेंगे आँख में गिरने ना दूंगा कभी ।
जुदा होना तुझे आता है, प्यार में फना होने हमें आता है ।
बस में तेरे सब कुछ, निमित्त बनाता है तू हमको ।
चलेगी हर जगह तेरी, पर हमें करीब बुलाना आता है तुझको ।
सपने तू दिखाता है, सच करने हमें आता है ।


- डॉ.संतोष सिंह