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Hymn No. 714 | Date: 06-Feb-1999
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इन्कार इकरार कुछ नहीं होता है, प्यार में सब कुछ दरकिनार हो जाता है।
इन्कार इकरार कुछ नहीं होता है, प्यार में सब कुछ दरकिनार हो जाता है।
सबका बदले स्वरूप बदले ना कभी प्यार का स्वरूप, प्यार तो प्यार होता है।
प्यार होना होता है तो किसी से हो जाता है, क्या अपना क्या बेगाना ।
परवाना हो या शमा, जिसने किया प्यार वो तो दीवाना होता है ।
मिटती है हर पहचान, कोई भेद न रह जाता, प्यार में चाहे तन का होया मन का ।
तडप दिल में रहती है, होश उड़ जाता है तन-मन का प्यार में ।
कैसे बताऊ क्या हाल होता है प्यार में, बेहाल भी नहीं वहाँ बस प्यार होता है ।
जग जीतना मुमकिन है एक बार, प्यार करना एक बार नामुमकिन हो होता है।
मत पूँछ कुछ तू हमसे, प्यार का रोग लग गया जो तेरा बुरा हाल होगा ।


- डॉ.संतोष सिंह