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Hymn No. 715 | Date: 07-Feb-1999
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सवार हो गया हूं मै तेरी किश्ती पे, फिकर न है मुझे किसीकी ।
सवार हो गया हूं मै तेरी किश्ती पे, फिकर न है मुझे किसीकी ।
इच्छायें अंगड़ाई लेती है तो लेने दे मन में, हम तो चले तेरी ओर ।
एक के बाद एक आयेंगी क्या-क्या मैं करुंगा पूरी, सबसे जरूरी बढ़ना तेरी ओर।
बढ़ने का ख्याल न भी है मन में, हम तो सवार हो चुके है तेरी किश्ती में ।
अचरज न है कुछ इस जीवन में, सहज है सब कुछ संसार में ।
रहबर तेरा प्यार पाना जीवन का चर्मोत्कर्ष है, न ही किसी से मुख मोड़ना ।
तेरे आगे कोई दलील है न चलती, गलती तो हम अपनी करने के चक्कर में है करते।
दिल की आवाज सुनते नहीं, मन के संग दौड़ लगाते है दुनिया भर में ।
कोई रंज नहीं मन में किसी बात का, सीख सीखतें तुझसे बढते रहेंगे तेरी ओर।
- डॉ.संतोष सिंह
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इन्कार इकरार कुछ नहीं होता है, प्यार में सब कुछ दरकिनार हो जाता है।
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मजबूर होते है अपने मन से न किसी से ।
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