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Hymn No. 728 | Date: 10-Feb-1999
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नजरों का भेद मिट गया, प्रभु जो प्यार तुझसे हो गया ।
नजरों का भेद मिट गया, प्रभु जो प्यार तुझसे हो गया ।
न जाने कहाँ मैं खो गया, निगाह जो तुझसे मिल गयी ।
मन शांत हो जाता है, पहुँचते ही करीब तेरे ।
नये-नये द्वंदो का जन्म होता है, दिल को जब तू याद आता है ।
अनकहे गीत सुनाने का मन करता है मिलते ही तुझसे ।
जानते है हम तू जानता है सबकुछ, फिर भी कहने का मन करता है हर बात तुझसे ।
तोड़ दे चुप्पी मेरी, मन के भावो को तू जगा दे ।
फना होना चाहता हूँ तेरे चरणों में सदा के लिये ।
अदा करने लायक न हूँ तेरा ऋण, जो तू चाहे वो ले सकता है जीवन से मेरे ।
गुस्ताखी माफ करना, प्यार में कुछ ज्यादा बोल जाता हूँ ।
- डॉ.संतोष सिंह
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निगाह मिलते ही तू हाल जान लेता है, हमारे दिलों का ।
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मस्ती छा जाती है हमपे, तेरी निगाहों से निगाह मिलते ही ।
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