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Hymn No. 734 | Date: 11-Feb-1999
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साँवरिया, साँवरिया दे दे मौका ढोने के लिये तेरी काँवरिया ।
साँवरिया, साँवरिया दे दे मौका ढोने के लिये तेरी काँवरिया ।
कोई शिकायत का मौका ना दूंगा, करुँगा सेवा तेरी इतनी ।
नजर होगी मेरी हर वक्त तेरे ऊपर, तू देगा आवाज उससे पहले हाजिर हूंगा ।
साँवरिया साँवरिया .....
कोई कोर कसर ना छोड़ेगा तेरे चरणों में दिन-रात जुटा रहूंगा ।
मौका मिला है न जाने कितने कालो के बाद, हाथ से न जाने दूंगा तुझे आज ।
साँवरिया साँवरिया .......
दिल में मेरे हर पल तू है, तेरे सिवाय किसी का कोई काम न है ।
मत पूछ क्यूं हूँ ऐसा चाहता, इस क्षुद्र को मौका मिला है जो आज गँवाने का कोई कारण न हूँ देना चाहता ।
साँवरिया साँवरिया .....
निहारा करुँगा अपलक, हूक्म की तामील करुँगा जान देके अपनी ।
मुझे न कुछ चाहिये अगर तू बना लेता है चरण पादुका तेरी ।
साँवरिया, साँवरिया ....... ।


- डॉ.संतोष सिंह