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Hymn No. 735 | Date: 07-Apr-1999
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प्यार में बहे वो क्या नहीं कह लेते हैं तुझको ।
प्यार में बहे वो क्या नहीं कह लेते हैं तुझको ।
रहते है तेरी मस्ती में भान नहीं होता गम और खुशीका ।
जो किस्मत में नहीं रहता, वो भी मिल जाता है यूँही ।
अपनों के खो जाने पे, गम नहीं होता दिल को ।
आनंद में रहते हैं, जाना हुआ सा लगता है सबकुछ ।
डर का न होता है दिल में कोई ठिकाना ।
सूझता नहीं कुछ हमको, तेरे सिवाय रहे चाहे कहीं भी ।
दिल को अब कुछ रास नहीं आता तेरे सिवाय ।
तलाश करता है हर पल तुझको किसी न किसी रूप में ।
सब कुछ हो जाता है पूरा, जब मुलाकात हो जाती है तुझसे ।


- डॉ.संतोष सिंह