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Hymn No. 737 | Date: 12-Feb-1999
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तेरे प्यार की बहार बह रही है, दिल से हमारे टकराके नगमों के रूप में गुँज रही है ।
तेरे प्यार की बहार बह रही है, दिल से हमारे टकराके नगमों के रूप में गुँज रही है ।
पीते है सरेआम जाम तेरी निगाहों से, फिजा में होता है बस प्यार का नाम ।
गुमनाम हो चले है तेरा नाम करके, अब हमारा यहाँ क्या काम ।
रूठा हुआ न हूँ किसी से, चुपचाप अपने प्यार को निहारता रहूं दिल के भीतर
हर पल फूट रहा है, इक नया गीत, जब दिलों में छेड रहा है तू संगीत ।
मुझे तो हर पल तुझसे प्यार है, प्यार में कोई न अब सवाल है ।
मचलता है दिल मेरा गाते हुये, कदमों को रोक नहीं पाता थिरकने से ।
फड़फड़ा रहा हूँ बंद तन के पिंजडे में, उडना चाहता हूँ अनंत दिशाओं में ।
चारों ओर छवी तेरी है अस्पष्ट सा दिखायी दे रहा है तू मुझे ।
सिलसिला प्यार का शुरू हुआ है, खत्म होनें के वक्त बयाँ कर पाने के हालत में न होंगे ।


- डॉ.संतोष सिंह