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Hymn No. 765 | Date: 18-Feb-1999
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तुझसे परे कौन है, प्रभु तेरा ही तो है सब कुछ इस संसार में ।
तुझसे परे कौन है, प्रभु तेरा ही तो है सब कुछ इस संसार में ।
अदना सा दास मैं तेरा, हूक्म तामील करने के लिये रहू तैयार सदा ।
अदा कर नहीं सकता ऋण तेरा, जो भी पाया वो तो है तेरा ।
तेरी कृपा है इतनी जब चाहा निहारा तुझको दिल के भीतर ।
ममतामयी मुस्कान है तेरी, करती है सबपे प्यार की बरसात ।
निगाहों में तेरे करुणा को हैं पाते, बरसती है जिनसे अमृत की धारा ।
मुझे याद नहीं वो एक पल, जब तुझको अपने से दूर हो पाया ।
जब भी ध्यान में गये तेरे, दिल से कुछ न कुछ गुनगुनाया ।
प्यार की तो तू है खान, बरसे सब पे बिन भेद के ।


- डॉ.संतोष सिंह