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Hymn No. 767 | Date: 18-Feb-1999
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अनोखेपन से कम न है दास्ताँ मेरी ।
अनोखेपन से कम न है दास्ताँ मेरी ।
कहाँ से कहाँ गुजरके तेरे दर पे पहुँच गये ।
बुलावा तो था तेरा न जाने कब से ।
जोर मारा प्यार ने जो आज पहुँच गया पास तेरे ।
कमियों का सरताज मैं करीब बुलाया तूने ।
तेरे बताये हुये कार्य को पूरा करेगे जरूर ।
सारे ढेर को सौंप देंगे तेरे श्री चरणों में ।
जहालत से भरे जीवन में से दिखायेंगे निकल के ।
तेरे दर पे प्यार की सौगात लेके आयेंगे ।
अफसाने तो कई लिखे गये इस जहाँ में ।
कुछ ऐसा कर जायेंगे, तू भी दंग रह जायेगा ।
प्राणों को गँवाना पड़ा तो गवाँयेंगे ।
तेरे कदमों को चूमने के लिये कुछ भी कर जायेंगे ।
हौंसला बुलंद होगा हमारा इतना ।
सागर और सीतारों को बाहों में समेट तुझे दे जायेंगा ।
गीत तेरा सदा हम गायेंगे, खुद को भुलायेंगे ।
जीते जी हर पल तेरा नाम करते जायेंगे ।


- डॉ.संतोष सिंह