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Hymn No. 768 | Date: 18-Feb-1999
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कैसे कहूँ तू अलग है मुझसे, जब भी पुकारा पास पाया तुझको
कैसे कहूँ तू अलग है मुझसे, जब भी पुकारा पास पाया तुझको
जिस किसीके पास गया, धीमे-धीमे तेरा नाम गुनगुनाता पाया ।
बाते बनाता न हूँ, जो जगजाहिर है वही तो कहता हूँ मैं ।
प्यार पावन न है कुछ, पावनता तो सदा तेरी याद दिलाये ।
भुलाये भूलता है सब कुछ, जब दिल को याद तेरी बहुत सताये ।
खतायें हो जाती हैं, प्यार में हर खता माफ की जाती हैं ।
रूमानियत से भर जाता है दिल, जो निगाह तुझसे मिल जाती है ।
गुमान न था हमको इतना, प्यार के हर झटके को बर्दाश्त करते जायेंगे ।
जो देगा तू आवाज, उसपे खुद को कुर्बान करते जायेंगे ।
तरन्नुम में तेरे प्यार की, जो तू चाहे वो काम कर जायेंगे ।


- डॉ.संतोष सिंह