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Hymn No. 770 | Date: 18-Feb-1999
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मन की गलियाँ मजबूर करती है भटकने के लिये, सहारा मिलता है तेरी यादों से ।
मन की गलियाँ मजबूर करती है भटकने के लिये, सहारा मिलता है तेरी यादों से ।
ऐसा कौन सा क्षण न होता है जब जन्मलेती न हो मन में, खेलते है तेरे भावों में बहने से ।
खफा हम किसीना किसीसे होते है, जब तेरे पास होते हैं खफा ना होते किसीसे।
सही और गलत का अंदाज न लगा पाते है, तेरे ऊपर छोड़ने से मुक्त होते है।
विचरते रहते हैं इच्छाओं के अबूद्ध खानो में, जब तेरा ध्यान आता है तो रोक लग जाती है ।
अधूरापन दूर न होता है हमारा, तेरे पास आते ही अधूरा पूरा हो जाता है ।
सिखाये ना सीख पाते कई बातें, तेरी बातों-बातों में सब कुछ सीख जाते हैं ।
वादा करके तोड़ना नियम बन जाता है, पूरा करने की उमंग जगाते हैं तेरे गीत।
भुलाये ना भूलती है कई बातें, तेरे साथ मिलते ही खुद को भूल जाते हैं ।
हाल बुरा हो जाता है जब दिल के भीतर तू न होता है, आने की अनुभूती होते ही रोम रोम में रोमांच हो जाता है ।


- डॉ.संतोष सिंह