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Hymn No. 779 | Date: 20-Feb-1999
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याद तेरी चित्त में छुपी है, हर बात है मन में ।
याद तेरी चित्त में छुपी है, हर बात है मन में ।
तन तेरी सेवा में रत है, दुनिया से हम विरत है ।
राग, राग होके राग न है, द्वेष की खायीं गयी है मिट ।
अपना पराया सब भुला, तेरे नाम में जीवन जो मेरा घुला ।
लोक लाज किस बात की, हाथ हो तेरा जब हाथ में ।
कितना तड़पा था, मोह की अनजान राहों पर भटक के ।
दामन जो छूटता है तन का, छूट जाने दूँगा आज ।
मिला है तेरे आंचल का साया, पूरी हुयी दिल की प्रतीक्षा ।
न जाने देना तू आज मुझे, ले चलना होगा साथ अपने ।
साथी है तू मेरा सबसे हसीन। दिल मेरा कमसिन है ।
- डॉ.संतोष सिंह
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