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Hymn No. 781 | Date: 20-Feb-1999
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मगरूर हूँ मै तो क्या से, मेरा गुरुर तू है ।
मगरूर हूँ मै तो क्या से, मेरा गुरुर तू है ।
सुरुर में जब रहा हूँ, तो परवाह न करूं किसीकी ।
अंदाज मेरा बदलता रहता है, जैसे जैसे करीब हो रहा हूँ तेरे ।
मेरा अब न कुछ अपना है, जो कुछ भी है वो तेरा है ।
अपनो की परवाह न है मुझे, गैर कोई लगता नहीं ।
सोया हुआ था तेरे गीतो को सुनके जाग उठा ।
रूठता न हूँ अपने आप पे, जब स्वीकारता ना हूँ ।
चोट कैसे किसी को पहुचाऊंगा, जुडा हूँ मै जो तुझसे ।
सबका दर्द सह जाऊंगा तेरे प्रेम में बहक के ।


- डॉ.संतोष सिंह