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Hymn No. 782 | Date: 20-Feb-1999
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निगाह तेरी भुलाये भूलती है, याद आते गजब ढा जाती है हमपे ।
निगाह तेरी भुलाये भूलती है, याद आते गजब ढा जाती है हमपे ।
मुलाकात हुयी थी तुझसे, सोचा न था तेरे प्यार के आगे कंगाल निकलेगा दिल मेरा ।
आसूँ छिपाये छुपते न है, याद आते ही आखों में उमड़ पड़ते है मेरे ।
खुशी हो या गम, दर्द होता है सीने में जो जीने न देता है हमको ।
दिल को समझाया बहुत, देखते ही तुझको तड़प उठता है मिलन के वास्ते ।
आशिकी का रोग लगाये न है लगता, लगते ही भूला देता है सारे बंधनो को ।
अंदाज मुश्किल है बयाँ करना तेरा, हर बार पाया कुछ-कुछ जुदा तुझको ।
तुझमें जो बात है वो कहीं और नहीं, खुदा तेरी यही तो पहचान है ।
बचना चाहता है तू सबसे, दीवाने पहचान लेते है, नजर पडते ही तुझको ।
तुझको कौन न है चाहता, चाहता तप किसीको ये बडी बात है ।
हमें क्या मालूम, आशिकी का रोग फैलाया है तूने इस सारे जहा में ।
बीमार हूँ मैं तेरा, यहाँ तो एक अनार सौ बीमार की बात हूँ देखता ।


- डॉ.संतोष सिंह