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Hymn No. 784 | Date: 21-Feb-1999
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जनमो-जनम के रिश्ते को निभाने तू धरा पे आया ।
जनमो-जनम के रिश्ते को निभाने तू धरा पे आया ।
कोरे आँसू थे हमारे उनपे तूने अनमोल प्यार लुटाया ।
परवाह न कि तूने किसी की हमें पास बुलाया सदा ।
अपने दुखों को भुलाके, हमारे दुखों को मिटाते रहा सदा ।
अज्ञानी हम जान न पाये तुझे, फिर भी तेरा प्यार पाया ।
हमारी श्रद्धा को स्वीकार किया, परिवर्तन प्यार से लाया जीवन में ।
हमारे दोषो से आंख मूंदकरके, उजाले पक्ष को उजागर किया ।
भागना ना सिखाया, व्यवहार करते हुये धर्म को निभाना सिखाया ।
मंजिल की बात भुलाके, रमना सिखाया परमपिता में तूने ।
अपने आपको जीतना ही सबको जीतना है याद दिलाया तूने ।


- डॉ.संतोष सिंह