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Hymn No. 786 | Date: 22-Feb-1999
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समझ नहीं आता, ये क्या हो जाता है, तेरे करीब आते ही खुदको भूल जाता हूँ।
समझ नहीं आता, ये क्या हो जाता है, तेरे करीब आते ही खुदको भूल जाता हूँ।
कैंसे क्या हो जाता है, जान न पाता हूँ, मेरी जान तुम बन जाते हो ।
कसम क्या खाना, खसम है तू मेरा, न जाने कितने जनमों का साथ है तेरा ।
हाथ में न कहे कुछ साथ जो है तू हमारे, बननी बिगडनी अब तेरे हाथो में है ।
जाऊँ कहां मैं, जहां में जहां हो तू वहीं तो है मेरा बसेरा ।
जिद न आती है, बीते सारी रात उध़ेड बून में कल होगी मुलाकात कैसे तुझसे ।
बेदर्दी उलाहना देता हूँ तुझे हजार, तडपता हुआ देखके हमको तू कराता है इंतजार।
बैचेन है हमारा दिल प्यार जबसे हुआ है तुझसे, बेदर्दी चैन से कैसे रहता है तू।
हालात हर पल बिगडती जा रही है प्यार में तेरे, दया करके न प्यार से आना करीब तू मेरे ।
खोने को तैयार हूँ तेरे प्यार के वास्ते सब कुछ, इंतजारी में धैर्य न रख पाता हूँ अपने आप पे।


- डॉ.संतोष सिंह