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Hymn No. 787 | Date: 22-Feb-1999
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प्रभु कुछ बोल दे, कुछ घोल दे जीवन में ।
प्रभु कुछ बोल दे, कुछ घोल दे जीवन में ।
हो जाये सुगम संगीत, बहता रहे निर्झर सदा ।
दिया है तूने बहुत कुछ, कुछ भी न लिया ।
आज मन किया है तुझे, सौंपने को तेरा सब कुछ है धरोहर ।
क्या न किया तूने हमारे लिये, कुछ न चाहा कभी तू हमसे ।
त्यागमय जीवन जिया तू सदा, औरों को दिया सब कुछ ।
कर दे तू कुछ ऐसा ढलके प्यार में बन जाये तेरा ।
रह न जाये दिल में कोई आस, तेरे सिवाय कोई न हो पास ।
हर पल विचारते रहे आनंद में, न हो कोई और सपना ।
जो भी कर तू है हमारी सहमती, तेरा बनने के लिये तैयार है ।


- डॉ.संतोष सिंह