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Hymn No. 789 | Date: 23-Feb-1999
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लौटा ले चल प्रभु हमें अब इस जहाँ से ।
लौटा ले चल प्रभु हमें अब इस जहाँ से ।
लगता नहीं दिल मेरा अब यहाँ किसी में ।
प्यार से रीता हूँ, पता नहीं कैसे जीता हूँ ।
खुद्दार नहीं, खुद्दारी का राग अलापता सदा ।
दिया है तूने हमें सब कुछ रोना छूटता नहीं ।
सताया हर बार तुझे, भूला न पाया खुद को ।
लेके आया टोकरा अरमानों का द्वार पे तेरे ।
उतारना चाहा दिल में तुझे बिना निकाले इच्छाओं को ।
प्रभु कैसे क्या कहूँ तडपता हूँ मैं तेरे लिये ।
सारे जहाँ का दोष तो है मेरा ।
- डॉ.संतोष सिंह
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