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Hymn No. 793 | Date: 24-Feb-1999
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खेतों की क्यारियों में पड़ा रहके फूल सूख जाये ।
खेतों की क्यारियों में पड़ा रहके फूल सूख जाये ।
इससे तो अच्छा है दम तोड़े अपना तेरे चरणों में ।
दुनिया के मायावी गलियों में भटकके रह जाये ।
इससे तो अच्छा है तेरा दास बनके जीवन जीते चले जाये ।
जीवन तो अभावमयहै कुछ कहना करना कर्मो का पहाड है ।
इन सबसे तो अच्छा है तुझे याद करते हुये खुद को भूला दे ।
दुःख की शुरुआत होती है मोह से यही तो जड़ता का घोतक है ।
तेरे प्रेम की ज्योत जलती रहे दिल में नष्ट हो जायेगा हर मोह ।
तूने लाख समझाया, फिरभी खड़ा हूँ मैं दोराहे पे ।
करले तू मुझे करीब इतना, मिट जाये हर तन-मन का भेद ।


- डॉ.संतोष सिंह