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Hymn No. 792 | Date: 24-Feb-1999
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नाता जोड़ने तुझसे चला, नाम देने आया ।
नाता जोड़ने तुझसे चला, नाम देने आया ।
हारा हुआ खिलाड़ी मैं, तेरा दिल जीतने चला ।
अनाडी हूँ रीत न जानूँ मैं, धर्म को निभाने चला ।
भटका था अब तक न जाने कहाँ-कहाँ दीदार करने चला ।
भला सा कोई काम न किया, तेरा प्यार पाने-चला ।
अविश्वास भरे कदमों से तेरे दर की ओर चली ।
आदतों से मुँह न मोड़, प्रभु तेरी बात करने चला ।
भरा था जीवन अंधकार से, ज्ञान की बात बताने चला ।
सरलता पूर्वक जीवन जी न पाया, अबूझ संसार की ओर चला ।
घर को मंदिर बना न पाया, संसार में प्रभु को खोने चला ।


- डॉ.संतोष सिंह