VIEW HYMN

Hymn No. 795 | Date: 25-Feb-1999
Text Size
नयनों से तीर चलने लगा प्रेम का, घायल हुआ दिल बेचारा ।
नयनों से तीर चलने लगा प्रेम का, घायल हुआ दिल बेचारा ।
सवार न पाया अपने आपको, शिकार हो गया प्रेम का तेरे ।
सुनी-सुनायी न कहता हूँ, जीवन की सच्चाई बयाँ करता हूँ ।
प्रेमी बहुत से देखे, तुझसा न देखा, जो एक तीर से घायल किया कइयों को ।
सनम वास्ता देता हूँ तुझे प्रेम का, बहियाँ न छोड़ना मेरी कभी ।
घायल किया है तूने, घायल ही रहने देना तेरी यादों के वास्ते ।
प्यार का अंजाम जो भी हो, तड़पेंगे सरेआम नाम लेके तेरा ।
मौत आयेगी तो क्या, बेखबर होंगे तेरे प्यार में हम ।
मुझे कोई क्या लेके जायेगा, जो होगा हाथों में हाथ तेरा ।
तेरे कंधे पे हो सवार, हम जायेंगे जहाँ तू लेके जायेगा ।


- डॉ.संतोष सिंह