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Hymn No. 796 | Date: 25-Feb-1999
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जगत पिता वंदना कर लेने दे, मौका मिलता है तेरी कृपा से ।
जगत पिता वंदना कर लेने दे, मौका मिलता है तेरी कृपा से ।
हृदय को तेरे गीतो से भर लेने दे, विचरते हुये तेरे ख्वाबों में ।
भटका हुआ मन पहूँचे करीब तेरे, छवि में लगन लगाने के लिये ।
हर भाव में तू है, तेरी यादों में खोते ही पहूँचते है पास तेरे ।
भक्ति कर लेने दे तू हमे, तेरे स्वागत को तैयार रहूँ तन-मन से ।
शक्ति पाता रहता हूँ तुझसे, जब निहारता है तुझे अपलक ।
प्रिय प्रेम भरे गीतों को गा लेने दे, कब छू जाये तेरे दिल को ।
तेरी आशिकी का रोग बढ़ जाने दे, चैन न आये हमको कहीं और ।
बढ़ता जाये प्यार हमारा, तुझे देखते ही होश खो दूं मैं अपना ।
मेरे मालिक सँवरने न देना, बिखर जाऊ तेरे दामन में आके ।


- डॉ.संतोष सिंह